ABHINANDAN KUMAR
अभिस्व और रहस्यमयी मणि | ABHISWA: The Tantric Fantasy Epic
"इस संपूर्ण ब्रह्मांड में ईश्वर ने ऐसी किसी वस्तु या जीव की रचना नहीं की है, जिसकी कोई उपयोगिता न हो। यदि आपका अस्तित्व है, तो आप निरर्थक नहीं हो सकते।"
क्या सनातन परंपरा का तंत्र-विज्ञान केवल चमत्कार है या प्रकृति और भौतिकी के नियमों का गूढ़ संलयन?
19 जनवरी 1990 की एक तूफानी रात को काल्ला (आसनसोल) के प्रसूति-गृह में दो नवजात शिशुओं की नियति चुपचाप बदल दी जाती है। भुवर्लोक के सर्वोच्च तांत्रिक विद्यापीठ—विक्रमशिला महाविहार—के अध्यक्ष महाआचार्य अलर्क दीपंकर एक अभिशप्त बालक को मृत्यु से बचाकर भूर्लोक के एक साधारण परिवार की गोद में छोड़ जाते हैं। उसकी बाईं बाँह पर अंकित है एक सुलगता हुआ रहस्यमयी निशान—‘अभि’।…