अभिस्व और रहस्यमयी मणि | ABHISWA: The Tantric Fantasy Epic

    "इस संपूर्ण ब्रह्मांड में ईश्वर ने ऐसी किसी वस्तु या जीव की रचना नहीं की है, जिसकी कोई उपयोगिता न हो। यदि आपका अस्तित्व है, तो आप निरर्थक नहीं हो सकते।"
    क्या सनातन परंपरा का तंत्र-विज्ञान केवल चमत्कार है या प्रकृति और भौतिकी के नियमों का गूढ़ संलयन?
    19 जनवरी 1990 की एक तूफानी रात को काल्ला (आसनसोल) के प्रसूति-गृह में दो नवजात शिशुओं की नियति चुपचाप बदल दी जाती है। भुवर्लोक के सर्वोच्च तांत्रिक विद्यापीठ—विक्रमशिला महाविहार—के अध्यक्ष महाआचार्य अलर्क दीपंकर एक अभिशप्त बालक को मृत्यु से बचाकर भूर्लोक के एक साधारण परिवार की गोद में छोड़ जाते हैं। उसकी बाईं बाँह पर अंकित है एक सुलगता हुआ रहस्यमयी निशान—‘अभि’।
    नालंदा के 'विश्वकर्मा निवास' में पला-बढ़ा चौदह वर्षीय अथर्व अपने ही घर में तिरस्कृत, उपेक्षित और अकेला है। हर दिन बेवजह की मार और उपेक्षा सहते हुए भी उसका मन गणित, भौतिकी और वैदिक रहस्यों के बीच तार्किक सूत्र खोजता रहता है। वह नहीं जानता कि जिसे दुनिया उसकी 'बदमाशी' समझती है, वह वास्तव में उसके भीतर सुलग रही एक ब्रह्मांडीय अग्नि है।
    जब विक्रमशिला के विशालकाय द्वार-पंडित नारोपा सत्य की देहरी पर दस्तक देते हैं, तो अथर्व का सामना अपने वास्तविक अस्तित्व से होता है—वह साधारण अथर्व नहीं, बल्कि वज्रवंश का अंतिम वारिस अभिस्व है!
    यहाँ से आरंभ होती है समानांतर आयामों की एक अविस्मरणीय यात्रा:

    • विक्रमशिला महाविहार (भुवर्लोक): जहाँ प्रवेश के लिए कोरी आस्था नहीं, तीखा न्यायशास्त्र और तार्किक प्रहेलिकाएँ हल करनी पड़ती हैं।
    • विशुद्ध सनातन विज्ञान: जहाँ नाद-ब्रह्म ध्वनिक अनुनाद (Acoustic Resonance) है, उदान-वायु गुरुत्वाकर्षण संतुलन (Levitation) है, और रसशास्त्र शुद्ध रसायन व पारद-विज्ञान।
    • तारक वन और रसातल का संकट: क्या अभिस्व अपने मित्रों ऋषा और एकांश के संग मिलकर कालकेतु के पुनरुत्थान को रोक पाएगा? और क्या महाभारत काल की अमर निधि—अश्वत्थामा की मस्तक-मणि—उसे बचा पाएगी या भस्म कर देगी?

    यह केवल एक फंतासी उपन्यास नहीं, बल्कि आत्मबल, वैज्ञानिक चिंतन और बाल-मन की उस अनकही पीड़ा का दर्पण है, जो बताती है कि "कच्चा कोयला ही भट्टी में तपकर हीरा बनता है।"
    लेखक: अभिनंदन कुमार (B.E., M.E., शिक्षक एवं शोधकर्ता)
    विधा: तांत्रिक फंतासी, पौराणिक विज्ञान-कथा, भारतीय महाकाव्य
    प्रकाशक: बिहार हेरिटेज पब्लिकेशन
    ISBN: 978-81-182184-0-1
    Keywords: Indian Fantasy, Vedic Sci-Fi, Vikramshila, Tantra, Ashwatthama, Hindi Epic, Abhiswa, Naropa, Nalanda, Indian Mythology.